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फलमक्खी की डकैती से मिलेगी छुट्टी - लगवाए मक्षिकारी

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किसान भाइयो, पाटिल बायोटेक द्वारा प्रस्तुत मक्षीकारी ट्रैप; फलमक्खी के नियंत्रण में अत्यंत उपयुक्त है.

क्या आपने फलमक्खी द्वारा क्षतिग्रस्त ग्रस्त फल देखे है?

आम, अमरूद, संतरा, कीनो, नींबू, तरबूज, खरबूजा,  ककड़ी, खीरा, करेला जैसे ८१ फसलों में आपने फलमक्खी की इल्लिया देखि होगी.   

वक्त रहेते इसका नियंत्रण ना किया गया तो ३० से ७० प्रतिशत फलोंकि सडन होने से खासा नुकसान हो सकता है.  

 

अगर आप अपनी फसल को फलमक्खी के प्रकोप से बचाना चाहते है तो आपको इस किट के जीवनचक्र को समझना होगा.

मादा कीट—नरोसे मिलन के बाद कोमल फलोंके छिलमें छेद कर  फलके भीतर अंडे देती है.

थोडेही दिनोंमे अंडों से निकली इल्लियां अंदर हि अंदर फलों के गूदे को खाना शुरू कर देती है. आगे जाके इसमे जीवाणू तथा फफुंद लग जाती है. क्षतिग्रस्त फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं तथा कमजोर होकर नीचे जमीनपर गिर जाते हैं.  इसके बाद इल्लीया जमीन मे प्रवेश कर - शंखी बना लेती है.

कुछ हि दिनोमे शंखीसे प्रौढ फल मक्खी निकल आती है जो मिलन कर अंडे देने में सक्षम होती है. फलमक्खी कि प्रजनन क्षमता इतनी अधिक होती है कि एक फलमक्खी मिलन के बाद, हजारो फलोमे डंख लगाके अंडे दे सकती है. इस तरह फलमक्खी का जीवन चक्र निरंतर चलता है जो आपकी फसल को बरबाद कर सकता है. बत्तीस डिग्री सेल्सिअस के नीचे का तापमान तथा ६० से ७० प्रतिशत बाष्प इस किट के पनपनेमे बहोतही सहाय्यक होता है.

फलमक्खी के जीवनचक्र से एक बात साफ़ है के इस किट की प्रजनन क्षमता ही इसकी मुख्य ताकद है. अगर हम किसी तरह इसके प्रजनन क्षमता पर असर कर पाए तो इससे होनेवाले नुकसानसे बचा जा सकता है.

किसान भाइयो, पाटिल बायोटेक द्वारा प्रस्तुत मक्षीकारी ट्रैप आपको फलमक्खी के प्रजनन को रोखने में सौ प्रतिशत मदत करता है.

मक्षिकारी ट्रैप एक कामगंध पाश है जिसे फेरोमेन ट्रैप भी कहा जाता है. इससे निकलने वाली “मादावाली” गंध फलमक्खी के नरोको आकर्षित कर ट्रैपमें मरवा देती है. मिलन के लिए नर उपलब्ध ही नहीं होते. इससे मादा मक्खि ना मिलन कर पाती है ना अंडे दे पाती है!

इस तरह मक्षिकारी, इस किट का सौ प्रतिशत नियंत्रण करने में सफल है.

तो अब हमे मक्षिकारीके इस्तेमाल के बारे में भी जान लेना चाहिए.

मक्षिकारी का ट्रैप स्थापित करने के बाद—४५ दिन तक—, यानि ४५ दिन और ४५ राते, निरंतर काम करता है. जब आपके फसलमें कलीया उगने लगे तो आप मक्षिकारी खरीद ले क्योकि फुल खिलते समय ही आपको इसे खेतोंमें स्थापित करना होगा. ट्रैप स्थापित करने हेतु पैकेट बंद टिकी बाहर निकाल इसपे लपेटा तार खोले. तार को ग्लास के बोटम लगे छेद से इस तरह निकाले के टिकी ग्लास के अंदर रहे. अब ग्लास का ढक्कन लगा दे. तार के मदत से ट्रैप फसल में टंग दे. 

कितने ट्रैप लगेंगे?

एक ट्रैप ५ -६ हजार स्क्वेअर फिट एरिया तक प्रभाव करता है इसलिए एक एकड़ में छह से दस ट्रैप लगवाने होगे. ४५ दिन बाद आप पुराने ट्रैप निकलवा दे और नये ट्रैप लगवाए ताकि फलमक्खी पूर्णत: नियंत्रणमें रहे.  

तो आप सोचते होंगे के मक्षिकारी मिलेगा कहा?

किसान भाइयो, जलगाव-महाराष्ट्र में उत्पादित मक्षिकारी ट्रैप  सम्पूर्ण भारत में फ्री होमडिलीवरी द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है. इस पेज के निचले हिस्से में मक्षिकारी के ऑनलाइन खरीद के ऑप्शन दिए गये है.

मक्षिकारी की कुछ खूबिया :

ध्यान रहे, यह एक पावरफुल फोर्म्युलावाला  ट्रैप है जो इस्तेमालमें बहोतही आसान है. इसके लगाने के बाद कोई भी जहरीली दवा छिडकने की बिलकुल भी जरूरत नहीं.

मक्षिकारी  वेदर प्रूफ है - तेज धुप तथा बारिश का इसपर कोई परिणाम नहीं होता इसलिए ४५ दिन बेझिझक चलता है.

इतनाही नही, पाटिल बायोटेक द्वारा उत्पादित मक्षिकारी इको-फ्रेंडली है, पोलीनेशन में मददगार मधुमक्खी पर मक्षिकारी का कोई भी दुष्परिणाम नहीं होता!

हमारे अन्य उत्पादनों के बारेमे जानना ना भूले! धन्यवाद!!

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