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लुकाछिपी के खेल में जीतके करे उड़नेवाले किटोंका नियंत्रण

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आपने थ्रिप, जस्सीड एव व्हाइट फ्लाय याने सफेद मक्खी जैसे किटोंके प्रकोप का अनुभव तो किया ही होगा. शायदही कोयी फसल हो जो इनके चपेटसे बची हो.

छोटे छोटे यह कीड़े अरबो-खरबोंकी संख्यामे अचानक ही फसल पर तूट पड़ते है. लहलहाती फसल का रस चूसकर, ये फसलको अधमरा कर देते है. इतनाही नहीं इनके माध्यम से व्हायरस जैसे जिव भी अपने फैलने का रस्ता बना लेते है.

ऐसे वक्त, किसान भाइयो, हमारे पास कोईभी चारा नहीं बचता जिससे हम अपने फसल की बर्बादी को रोक पाए.

कृषि सेवा केंद्र या किसी सलाहकार के सलाह अनुरूप हम जितनी अधिक जहरीली दवा हो सके—उसका छिडकाव करते है.

चाहे यह दवा कितनी ही कडवी तथा महँगी क्यों ना हो!

दुःख या परेशानी की बात इतनी ही होती है के इतने सारे खर्चे तथा मेहनत के बाद भी किट का प्रकोप थम जाए ये जरूरी नहीं! दवा बदल बदल के छिडकते—छिडकते हम सिर्फ वक्त और पैसा ही बरबाद नही करते बल्कि खुद की,  फसल की एव फसल के ग्राहक की  सेहत परभी बुरा असर डाल देते है.

तो क्या हमे अपने तरीकोंमें बदलवा करना चाहिए? ऐसा क्या करे—जो फसल की बरबादी रोक सके, खर्चा बढ़ने से बचा सके. क्या इतनी सारी जहरीली दवा की छिडकाव से, केन्सर जैसे बीमारियों से एव पर्यावरण के हानी से बचना नामुमकिन है?

किसान भाइयो. पाटिल बायोटेक, जलगाव, महाराष्ट्र द्वारा प्रस्तुत यलो एव ब्ल्यू स्टिकी ट्रैप, इस मिशम में आपके मुख्य सहाय्यक बन सकते है. तो क्या इनके बारेमे जानके के लिए आप उत्सुक है?

आगे जानेसे पहले हमे यह भी जान लेना चाहिए की अरबो-खरबों की संख्या में यह किटक अचानक ही आते कहा से है? जो हम ये बात समझ पाए तो बाजी पलट सकती है!

बुआई करने के बाद, जब फसल उग आती है तो हम उसे नत्र से भरपूर खाद देते है. फसल लहलहाने लगती है. आस-पास के खेतोंसे एव बांधोपर उग आए खरपतवार से कुछ-सौ-किटक इस लहलहाते फसल में घुस आते है. पोषण से भरपूर रस ग्रहण कर वो अपने नस्ल को बढ़ाने के काम में जुट जाते है. हर एक मादा हजारोंकी संख्यामे अंडे देती है.

अन्डोसे निकले शिशु किटक फसल का रस चूसने में पूरी जान लगा देते है और तेज गति से प्रजनन योग्य बन जाते है

तो अब आप जान ही गए होंगे के अरबो खरबों की संख्या अचानक ही आती कहा से है?.

तो ऐसा क्या है जो हमे शुरवाती दिनोंमे इनके खेतोमे आने की खबर नहीं होती?

यह तो प्रकृती का नियम ही है. हर जिव को पनपने के लिए प्रकृतीने कुछ खुबिया दियी है.

ये किटक किसानोंके साथ लुकाछिपी का खेल खेलते है. शुरूआती दिनों में जब किसान अपने फसलमें चक्कर लगाकर फलक की सेहत का जायदा लेता है तब यह कीटक निश्चल रहकर, पत्तोके निचे तथा मिट्टीमे छिपकर किसान की नजर से बचे रहते है.

ये लुकाछिपी का खेल तबतक चलता है जबतक इनकी संख्या अरबो-खरबोंमें चली जाती है. लेकिन तबतक बजी किसान के हतोंसे निकल चुकी होती है. जहरीली दवा की बेतहाशा छिडकाव के अलावा कोई चारा नही रहता.

तो पते ही बात यह है के हमे कीटोके इस लुकाछिपी के खेल में जितना जरूरी है.

पाटिल बायोटेक द्वारा प्रस्तुत नीले एव पीले स्टिकी ट्रैप यानी चिपचीपे फंदे आपको इस खेलमें जितवा सकते है. इनके रंग में एक खूबी है.

किटकोको ये रंग नीले या पीले नजर नहीं आते. उनकी नजर में वो नये रसदार पत्तों जैसे होते है. वो आसानीसे उनके प्रति आकर्षित हो जाते है.

ओर इन पर लगे चिपचिपे लेप पर चिपक जाते है. क्योकि यह ट्रैप दिन-रात लगी रहती है, इसपर कीटक चिपकते ही रहते है. अब जब आप फसल की सेहत का जायदा लेने जाएंगे तो आपको ट्रैप पर लगी किट दिखाई देगी. इनकी संख्या एव प्रकार का एहसास आपको हो जाएगा.

अब आपके पास दो तरीके है जो इन किटोंकी संख्या आगे बढने नही देंगे.

क्योंकि इनकी संख्या कम है और ये अबतक अंडे नही दे पाए है, कीटकनाशी या हर्बल दवा का हलका छिडकाव इनकी रोकथाम कर देगा.

अगर आप चाहे तो यलो एव ब्ल्यू स्टिकी ट्रैप की संख्या बढ़ा दे ताकि किट इसपर चिपकते रहे और अंडे दे ही ना पाए.

इन दोनों तरीकोंको एकसाथ आजमानाभी कुछ खास खर्चीला ना होगा.

तो आप सोचते होंगे के स्टिकी ट्रैप मिलेगा कहा?

किसान भाइयो, जलगाव-महाराष्ट्र में उत्पादित स्टिकी ट्रैप सम्पूर्ण भारत में फ़्री-होमडिलीवरी द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है.

पाटिल बायोटेक सर्व्हिसेस डॉट इन इस वेबसाइट पर आप इसकी ऑर्डर दे सकते है. इस पेज के निचले हिस्से में स्टिकी ट्रैप के ऑनलाइन खरीद के ऑप्शन दिए गये है.

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फ्री होम डिलीवरी है.

स्टिकी ट्रैप की कुछ खूबिया

  • इसकी बनावट में जो रेशेदार शिट का उपयोग किया गया है वो हवा की दबावका सहजता से सामना करता है.
  • इसपर लगा चिपछिपा लेप धुप में ना सूखता है, ना पिघलता है. बारिश या धुंद के पानी में घुलता भी नहीं.
  • इतनाही नही, पाटिल बायोटेक द्वारा उत्पादित स्टिकी ट्रैप इको-फ्रेंडली है, मधुमक्खीजैसे आकार में बड़े कीटक इसपर चिपक नही पाते 

हमारे अन्य उत्पादनों के बारेमे जानना ना भूले! धन्यवाद!!

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