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भारी मुनाफेवाली तरबूजकी खेती

मुझे याद है दो साल पहले एक कीसान मित्र ने मेरी सलाह नुसार तरबूज की बुआई तथा रख रखाव किया. लहलहाती फसल को देख उसने मुझे बताया के वो रेकोर्ड ब्रेक कटाई करने वाला है! वो बेहद ही खुश था और उसने मेरी सलाह के लिए मुझे धन्यवाद भी दिया. इस घटना के १०-१२ दिन बादही मुझे उसका फोन आया के शहर के मार्केट में कोयी खरीददार है क्या देखे. उसने दर्जनभर व्यापारियोंसे संपर्क किया था जो २ रु किलो का भाव देने के लिए राजी थे. ऐसे दरो में तरबूज की विक्री करना किसानके लिए एक घाटे का सौदा था. मैंने शहर में तरबूज के विक्रेताओंसे संपर्क किया लेकिन सभी ने सीधे किसानसे फल खरीदने से मना कर दिया. उनके अपने व्यावसायिक कारण थे जिन्हें हम ठुकरा नही सकते.

इस बात को ध्यानमें रखते हुए मै नहीं चाहता के आपको सिर्फ बुआई तथा रखरखाव के बारे में बताया जाए. तरबूज की खेती करते समय बुआई से पहले हमे इसके मार्केटिंग के बारे में सोचना होगा. चाहे तो हम कम क्षेत्र में बुवाई करे लेकिन उचित मुनाफे की गारंटी होनी चाहिए.

दुनियामे हर चीज की कीमत डिमांड-सप्लायके माध्यमसे तय होती है. अनुभव से हमलोग जानते है के अगर व्यापारी खेतोमे कमसे कम ८ रु का रेट दे तो हमे मुनाफा हो सकता है. अगर बाजार में सप्लाय जादा हो तो कंझुमर १५ रु के दर से खरीद करता है और अगर सप्लाय कम हो तो २० रु से खरीदता है. मतलब बिलकुल साफ़ है....ठोस एव रिटेल विक्री में कम से कम ७ रु प्रति किलो का अंतर है जिसमे व्यपारी की मेहनत, ट्रांसपोर्ट, मार्केटिंग का खर्चा एव मुनाफा छुपा है.

व्यापारी हमारे व्यावसायिक भागीदार है ऐसा मै मानता हु. जब सप्लाय जादा होती है तो व्यपारीको बाजारमें स्पर्धा का समाना करना पड़ता है. ऐसे वक्त अपने मुनाफे को बनाये रखनेके लिए वो किसानोंके मुनाफे में हिस्सेदारी लेने की कोशिश करता है. अर्थात सबकुछ इतना सरलभी नही होता यह बात हम सबको समझनी होगी.

  • सबसे पहले हमे प्रोडक्ट की क्वालिटी एव व्हरायटीकी और ध्यान देना होगा. किसी एकही किस्म का चुनाव ना करे. कमसे कम दो अलग अलग बिजोंका उपयोग करे. तरबूज के आलावा, जायद की अन्य फलसे जैसे खरबूज, खीरा एव करेला की खेती भी साथ में करे. इसमें भी एक से अधिक प्रकार के बिज चुने.
  • खेतोमे आपके हात बटानेवाले मजदूर हो या शहर में रहनेवाले आपके रिश्तेदार या मित्र, इनकी मदत से आप सीधे मार्केटिंग का प्लान बनाए. अगर आप इन्हें उचित सप्लाय की गैरंटी दे तो हो सकता है के ये लोग रिटेल विक्री में आपका हात बटा दे. सात रु प्रति किलो के भाव के अंतर में इनकी हीस्सेदारी तय हो जाएगी. अगर आपके पहचान में किसी के पास छोटे-हाथी जैसा वाहन है तो वह बहोत ही उमदा भागीदार बन सकता है. रेग्युलर सप्लाय देने हेतु आपको बुवाई का टाइमटेबल बनाना होगा. दूसरा रास्ता ये भी हो सकता है के आप अन्य किसानोंसे सप्लाय ले.
  • अगर आपने रिटेल मार्केटिंग की बात मन में ठानी है तो भी ध्यान रहे के आपके उपज का कुछ हिस्सा उचित दाम मिलने पर ठोस भाव में भी विक्री किया ही जा सकता है. ऐसा करनेसे नियमित मार्केटसे आपके संबंध बने रहेंगे. ये बात बहोतही जरूरी है.
  • बेमोसम बरसात और ओले गिरने की समस्या आपके सामने अचानक ही एक चुनौती निर्माण कर सकती है. ऐसे स्थितिमें खुले खेत में ३० से ८० प्रतिशत नुकसान हो सकता है. इस अवस्थामें नुकसान को कम करने हेतु दो तरिके इस्तेमाल करे. अपने ही क्षेत्र में आप नर्सरी ट्रे में कुछ पौधे हमेशा मेंटेन करे. हो सकता है के आपको ऐसे ट्रे की ३-४ बैचेस लगानी पड़े. लेकिन संकट के समय ये नर्सरी आपको फायदेमंदही रहेगी.
  • जपानी किसान तरबूज को अलग अलग शेप देते है. चाहे आप यह व्यावसायिक स्तरपर ना करे लेकिन स्क्वेअर और हार्ट शेप में कम से कम १०० तरबूज प्रति एकड़ जरुर बनाए. इनका अलग शेप रिटेल ग्राहकोंको आकर्षित करने के लिए एव उनकी रूचि जागृत करने में मददगार साबित होते है. दिखावा करना मार्केटिंग एक महत्वपूर्ण भाग है, ये ध्यानमें रखे.
  • सोशल मिडिया का उचित इस्तेमाल करना जरुरी है. आप अपने खेत-रखरखाव व उत्पादन कि उपलब्धता के बारेमे सही जानकारी सोशल मिडियापर जरूर साझा करे.
  • सॉफ्टड्रिंक के उत्पादक मार्केटमें भ्रम फैलाते है के तरबूज में इंजेक्शन द्वारा रंग एव मिठास भरी जाती है. सोशल मिडिया द्वारा उचित तरीकेसे आप अपने उत्पादन के क्वालिटी की बात जरुर रखे. सॉफ्टड्रिंक में इस तरह की मिलावट बड़ी आसानीसे हो सकती है ये बात आम जनता जानती है.
  • प्री-सीझन तरबूज की बुआई नव्हंबर-डिसंबर में होती है. सीझनल तरबूज की बुआई जनवरी-फरवरी-मार्च में होती है.
  • बालुई मिट्टी अच्छी होती है लेकीन हर तरह के मिट्टीमे कियी जा सकती है, पाणी के निकासी का उचित प्रबंधन करे. मिट्टी कि तयारी करते समय (प्रति एकड़) २५ क्विंटल गोबर खाद के साथ १० किलो सोईल ग्रेड मायक्रोडील मिलाए. इस फलसके लिए "बेड-मल्चिंग -ड्रिप सिस्टिम" (मल्चिंग ३५ मायक्रोन, ड्रिप १६ एम् एम्) लगाना उचित होता है. कुछ किसान मिर्च निकालने के बाद उसी बेड-मल्चिंग-ड्रिप सिस्टिम में तरबूज के पौधे लगाते है. इसके ठीक उलटा भी किया जा सकता है, जिसमे तरबूज की कटाई शुरू करने से पहले आप इसमें अंतर बनाके मिर्च के पौधे लगाए. जब तरबूज की कटाई पूरी हो जाएगी तबतक मिर्च के पौधे अच्छेसे बढने लगेगे.
  • जायद की फसल होनेसे पर्याप्त जल उपलब्ध होना जरूरी है. "बेड-मल्चिंग-ड्रिप" सिस्टिम होने से जल की मात्र कम लगेगी. पहले माह में प्रति दिन आधा घंटा देना पर्याप्त होगा. लेकिन जब फल की साइज बढगी तब प्रति दिन २-३ घंटे पानी देना आवश्यक हो जाएगा.
  • कटाई के वक्त आपके उत्पादित तरबूज में १3 से १5 प्रतिशत के बिच में ब्रिक्स होनी चाहिए. इसके  अभ्यास हेतु आप रिफ्राक्टोमीटर का उपयोग करे. इसकी लिंक डिस्क्रिप्शन में आपको दे रहे है. रिफ्राक्टोमीटर खरीदने हेतु यहा क्लिक करे.
  • उपयुक्त मिठास की निर्मिती के लिए फसल को संतुलित खाद देना जरूरी है. इसमें अमृत गोल्ड एनपिके वाटर सोल्युबल खाद, अमृत किट एव मायक्रोडील के डोसेस का समावेश होता है.
  • इस फसल में मुख्य समस्या फलमक्खी की होती है. यह किट फुल के ओव्हरी या फल के सतह पर डंख लगाके अंडे देती है. इन अन्डोसे इल्लिया निकलती है जो फलका गुदा खाती है. ध्यान ना देने पर ७५ प्रतिशत फल नष्ट हो सकते है. छिडकाव से इस किट का नियंत्रण नही होता. लेकिन आप मक्षिकारी ट्रैप के इस्तेमाल से फलमक्खी पर १०० प्रतिशत नियंत्रण पा सकते है. एक एकड़ में ६-८ ट्रैप लगते है जिसका खर्चा ५०० रु के आस पास ही होगा.

  • फलमक्खी के आलावा इसमें जादा किट नही लगते. कुछ हिस्सोमे लीफ मायनरआ सकती है जिसका नियंत्रण कोराजेन के छिड़काव से होता है. किटोकी निगरानी के लिए आप एक एकड़ क्षेत्रमें ७ पीले व् ३ नील स्टिकी ट्रैप लगवाए. इनके निरिक्षणमात्र से आपको आनेवाले किट का अंदेशा हो जाएगा.

  • एक एकड़में ६००० बेल लगेगे. जर बेल पर २ फल हो सकते है जिनका औसत वजन ३-४ किलो होगा. इस तरह आपको एक एकड क्षेत्र मे ३६-४८ टन का उत्पादन होगा. जिसका ठोस विक्री मूल्य ३.३६ लाख एव रिटेल विक्री मूल्य ६.३ लाख होगा.
  • उपर्रोक्त बिन्दुओमें सुझाए गये खाद एव ट्रैप https://www.patilbiotechservices.inइस वेबसाइटसे खरीद सकते है. कृषि सेवा केन्द्रोमे उपलब्धता के लिए एव डोसेस के विस्तृत जानकारी के लिए आप ९७६४३३६३३३ इस व्हाटसएप नम्बर पर संपर्क करे. संपर्क करते समय आपका पूरा नाम, पता, पिनकोड एव फसल की जानकारी जरुर दे.

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