कम लागत, थोड़ी मेहनत – फायदा जादा

निलगिरी (सफेदा) दुनियाके सबसे उचे पेड़ोंमे शामिल है. यह तेजी से बढ़ता है और सात साल में ३५ मीटर उंचा हो जाता है. झिरो से लेकर पैतालीस डिग्री तक तापमान सहता है, दोमट और मटियार भूमि अच्छी होती है. इसमें इसकी जड़े जमीन में काफी अंदर तक जाती है, इसलिए बहरी शुष्कता का इसपे इतना असर नही होता. पानी की कम जरूरत होती है. एक ग्राम लकड़ी के लिए ४५० मिली पानी लगता है, यह मात्रा अन्य पेड़ोंसे काफी कम है.

निलगिरी से मिलने वाले फायदे:

  • इंधन की लकड़ी: पाच साल का होने के बाद सूखे टहनियोंके रूप में इंधन की लकड़ी मिलती है. एक पौधे से साल भर में दो क्विंटल इंधन मिलेगा.
  • तेल: हरी पत्ती से तेल मिलता है. जो लकड़ी से भी महंगा जाता है.
  • सुखी पत्ती: तेज जलती है, अच्छी आच देती है. इसलिए छोटे मोटे उद्योगोमे इंधन का काम देती है
  • सडी पत्ती: खाद देती है
  • लकड़ी का उपयोग: कागज बनाने में काम में आता है
  • सात साल में ८५ प्रतिशत फायदा मिल जाता है.

प्रोपर्टी डेव्हलेपमेंट में उपयोगी: अगर आप कोई’ बंजर प्रोपर्टी लेके रखना चाहते है तो इसपर निलिगिर लगवाए.

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